कोटद्वार में कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन: जंतर-मंतर पर छात्रों पर लाठीचार्ज और पेपर लीक के विरोध में गरजे पूर्व मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी गौ सेवा या घोटाले का जरिया? राजस्थान के 57 करोड़ रुपये के कथित घोटाले ने उठाए कोटद्वार में भी गंभीर सवाल लालढांग–चिल्लरखाल मार्ग निर्माण का रास्ता साफ: वन विभाग ने PWD को सौंपी जिम्मेदारी, क्षेत्र में खुशी की लहर कोटद्वार का रमेश नगर: जलभराव और कचरे के ‘अभिशाप’ से त्रस्त, डेंगू का बढ़ता खतरा कांग्रेस की परिवर्तन संकल्प यात्रा का डॉ हरक सिंह रावत ने किया शुभारंभ कोटद्वार: कंचनपुरी कूड़ा निस्तारण केंद्र के विरोध में मुख्य सचिव को सौंपा ज्ञापन, मिला कार्रवाई का आश्वासन

कोटद्वार का रमेश नगर: जलभराव और कचरे के ‘अभिशाप’ से त्रस्त, डेंगू का बढ़ता खतरा

 

कोटद्वार: मानसून की पहली फुहारों के साथ ही कोटद्वार के रमेश नगर (वार्ड संख्या 9) के निवासियों के लिए मुसीबत का सबब शुरू हो गया है। पिछले दो दिनों से हो रही  बारिश ने क्षेत्र की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी है। खेतों में जमा हुआ वर्षा का पानी अब नाले का रूप ले चुका है, जो सीधे स्थानीय लोगों के घरों में घुस रहा है।

कचरा और पानी: एक जानलेवा मिश्रण

 

स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह ‘हर साल का रोना’ है। खेतों में पानी के साथ-साथ भारी मात्रा में कूड़ा-कचरा तैरकर घरों तक पहुँच रहा है। विडंबना यह है कि नगर निगम की कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां नियमित रूप से घरों तक आती हैं, फिर भी कुछ लोग मात्र चंद पैसे बचाने के लालच में कूड़े को गाड़ी में न डालकर खेतों में फेंक रहे हैं। यही कचरा अब बारिश के पानी के साथ मिलकर मोहल्ले में फैल रहा है, जिससे संक्रमण का खतरा पैदा हो गया है।

 

डेंगू के डर से सहमे लोग

 

बरसात के रुके हुए पानी में मच्छरों का पनपना स्वाभाविक है। निवासियों को डर है कि यह जलजमाव जल्द ही डेंगू और अन्य संक्रामक बीमारियों का केंद्र बन जाएगा। एक स्थानीय निवासी ने व्यथित होकर कहा, “पानी और गंदगी का यह मिश्रण हमें बीमारियों की ओर धकेल रहा है, लेकिन प्रशासन और हमारे जन प्रतिनिधि मूकदर्शक बने हुए हैं।”

 

जनप्रतिनिधियों की उदासीनता पर आक्रोश

 

क्षेत्रवासियों में इस बात को लेकर भारी गुस्सा है कि समस्याओं के बावजूद उनके पार्षद मौके का जायजा लेने तक नहीं आते। वार्ड संख्या 9 के लोग अब प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। निवासियों का कहना है कि अगर समय रहते खेतों की सफाई और जल निकासी का स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी भयावह हो सकती है।

 

प्रशासन से क्या है मांग

 

तत्काल सफाई अभियान: बारिश के पानी और जमा हुए कचरे को तुरंत हटाया जाए।

 

जवाबदेही: जो लोग खेतों में कूड़ा फेंक रहे हैं, उनके खिलाफ नगर निगम जुर्माना लगाए और सख्त कार्रवाई करे।

 

स्थायी समाधान: खेतों के जलभराव को रोकने के लिए नालियों का निर्माण और निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

क्या कोटद्वार नगर निगम तब जागेगा जब कोई बड़ी बीमारी इस क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लेगी? यह सवाल आज रमेश नगर का हर नागरिक पूछ रहा है।

Leave a Comment

और पढ़ें