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ब्यूरो रिपोर्ट – नितिन शर्मा
देहरादून/कोटद्वार, 29 जून 2026
कोटद्वार के कंचनपुरी में प्रस्तावित ठोस कूड़ा निस्तारण केंद्र (Trashing Ground) का विवाद अब प्रदेश के शीर्ष प्रशासनिक स्तर पर पहुँच गया है। कंचनपुरी में बन रहे इस केंद्र के विरोध में आज उत्तराखंड बेरोजगार संघ के अध्यक्ष राम कंडवाल ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन से मुलाकात की और क्षेत्र की जनता की चिंताओं को देखते हुए एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। मुख्य सचिव ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत संज्ञान लिया और जल्द ही शहरी विकास विभाग के सचिव को बुलाकर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
घनी आबादी और शैक्षणिक संस्थानों के बीच डंपिंग ज़ोन का विरोध
मुख्य सचिव से मुलाकात के दौरान राम कंडवाल ने अवगत कराया कि जिस स्थान पर कूड़ा निस्तारण केंद्र प्रस्तावित है, उसके ठीक पास कई संवेदनशील स्थल और घनी आबादी है। क्षेत्र की जनता इस फैसले के खिलाफ पिछले 40 दिनों से लगातार शांतिपूर्ण धरने पर बैठी है। जनहित, पर्यावरण संरक्षण और विद्यार्थियों के भविष्य को देखते हुए इस परियोजना को कंचनपुरी से हटाकर किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित करने की मांग की जा रही है।
प्रस्तावित कूड़ा निस्तारण केंद्र के ठीक पास कॉन्वेंट स्कूल, बोक्सा जनजाति महिला छात्रावास और पॉलिटेक्निक कॉलेज हैं। ऐसे में यहाँ डंपिंग ज़ोन बनाना सैकड़ों छात्रों के स्वास्थ्य और भविष्य के साथ खिलवाड़ है।”*
राम कंडवाल, अध्यक्ष (उत्तराखंड बेरोजगार संघ)
ज्ञापन में उठाई गईं 9 प्रमुख मांगें:
ज्ञापन के माध्यम से मुख्य सचिव के समक्ष निम्नलिखित तार्किक बिंदु और मांगें रखी गईं:
कंचनपुरी में तत्काल रोक: कंचनपुरी में बन रहे ठोस कूड़ा निस्तारण केंद्र के निर्माण पर तुरंत रोक लगाई जाए।
छात्रों के स्वास्थ्य की रक्षा: मात्र 70 मीटर की दूरी पर स्थित कॉन्वेंट विद्यालय और निकटवर्ती पॉलिटेक्निक कॉलेज के छात्रों के शैक्षणिक माहौल व स्वास्थ्य की रक्षा हो।
बोक्सा जनजाति छात्रावास की सुरक्षा: महज 100 मीटर की दूरी पर स्थित बोक्सा जनजाति महिला छात्रावास की छात्राओं के स्वास्थ्य व सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।
धार्मिक व पर्यटन गतिविधियों पर असर: यह स्थल ऐतिहासिक कण्व आश्रम जाने वाले मुख्य मार्ग पर स्थित है। यहाँ कूड़ाघर बनने से धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों पर बेहद नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
नदी और पर्यावरण का संरक्षण: मुख्य राजमार्ग और निकट बहने वाली नदी के पास कूड़ाघर होने से जल और वायु प्रदूषण फैलेगा, जिससे पूरी घाटी का पर्यावरण दूषित होगा।
वैकल्पिक स्थान का सुझाव : उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे किसी उपयुक्त क्षेत्र में 5-7 बीघा भूमि उपलब्ध कराकर वहाँ वैज्ञानिक पद्धति (Scientific Layout) से कूड़ा निस्तारण केंद्र स्थापित किया जाए।
मुख्य सचिव ने दिया त्वरित कार्रवाई का आश्वासन
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने डंपिंग ज़ोन की भौगोलिक स्थिति और जनभावनाओं से जुड़े सभी बिंदुओं को गंभीरता से सुना। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस विषय पर जल्द ही संबंधित विभागीय सचिवों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी और जनहित को ध्यान में रखते हुए उचित व त्वरित कार्रवाई की जाएगी।
उग्र आंदोलन की चेतावनी
राम कंडवाल ने साफ शब्दों में कहा कि कंचनपुरी की जनता और युवाओं का यह विरोध पूरी तरह न्यायसंगत है। यदि जनहित और पर्यावरण की अनदेखी कर कंचनपुरी में ही जबरन कूड़ा निस्तारण केंद्र बनाने का प्रयास किया गया, तो क्षेत्र की जनता को साथ लेकर आंदोलन को और अधिक उग्र व व्यापक किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।







