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युवाओं की पहली पसंद विजय रावत: क्या 2027 में कोटद्वार विधानसभा से कांग्रेस का चेहरा बनेंगे?

ब्यूरो रिपोर्ट

कोटद्वार। उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनावों की सरगर्मी अभी से महसूस होने लगी है। सभी राजनैतिक दल अपनी-अपनी गोटियां सेट करने में जुट गए हैं। इस बीच, कोटद्वार विधानसभा सीट पर युवाओं के बीच एक खास और मजबूत पहचान रखने वाले यूथ कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष विजय रावत की दावेदारी को लेकर चर्चाएं बेहद तेज हो गई हैं।

कोटद्वार के राजनैतिक गलियारों में यह सवाल तैर रहा है कि क्या कांग्रेस पार्टी इस बार एक युवा और जुझारू चेहरे पर दांव खेलेगी?

जन मुद्दों पर हमेशा बुलंद की आवाज

​विजय रावत की पहचान कोटद्वार क्षेत्र में एक ऐसे नेता के रूप में है जो सिर्फ चुनावों के समय सक्रिय नहीं होते, बल्कि साल के 365 दिन जनता के बीच रहते हैं। सड़क, पानी और बिजली जैसी मूलभूत जन समस्याओं को लेकर उन्होंने लगातार संघर्ष किया है।

​इतना ही नहीं, प्रदेश को झकझोर देने वाले अंकिता भंडारी हत्याकांड में भी विजय रावत ने कोटद्वार से लेकर देहरादून तक युवाओं को लामबंद करते हुए अपनी आवाज पूरी ताकत से बुलंद की थी।

जनता के सुख-दुख में भागीदारी और व्यवस्था के खिलाफ मुखर रहने की उनकी इसी शैली के कारण कोटद्वार के युवाओं में उनका एक अलग और मजबूत जनाधार है।

राहुल गांधी की ‘युवा सोच’ और विजय रावत

​कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी लगातार इस बात की वकालत करते रहे हैं कि संगठन और चुनावी राजनीति में समय-समय पर युवा चेहरों को आगे लाया जाना चाहिए। राहुल गांधी का मानना है कि युवाओं के जोश और उनकी नई सोच से ही पार्टी और समाज दोनों को नई दिशा मिल सकती है।

​हाल ही में (जनवरी 2026 में) कोटद्वार के एक अन्य मामले के दौरान भी जिस तरह राहुल गांधी ने स्थानीय स्तर पर संविधान और सामाजिक सद्भाव के लिए खड़े होने वाले युवाओं की पीठ थपथपाई थी, उससे यह साफ संदेश जाता है कि शीर्ष नेतृत्व की नजर जमीन पर संघर्ष करने वाले युवा चेहरों पर बनी हुई है।

क्या दांव खेलेगी कांग्रेस?

​कोटद्वार विधानसभा सीट हमेशा से ही राजनैतिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील रही है। वर्तमान राजनैतिक परिदृश्य को देखते हुए कोटद्वार की जनता भी अब बदलाव और एक ऐसे जनप्रतिनिधि की उम्मीद कर रही है जो उनकी रोजमर्रा की समस्याओं को सदन में मजबूती से रख सके।

​विजय रावत का युवाओं में क्रेज और लगातार जन मुद्दों को उठाना उन्हें टिकट की रेस में एक मजबूत दावेदार के रूप में स्थापित करता है। हालांकि, अंतिम फैसला कांग्रेस आलाकमान को करना है। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या कांग्रेस पार्टी राहुल गांधी की युवा नीति पर आगे बढ़ते हुए कोटद्वार से विजय रावत को अपना उम्मीदवार बनाती है या नहीं। लेकिन एक बात साफ है कि विजय रावत की सक्रियता ने कोटद्वार की राजनैतिक हलचल को जरूर बढ़ा दिया है।

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